उत्तराखण्ड:गरिमा को इलाज तक नहीं दे पा रही है सरकार, पिता ने मांगी इच्‍छा मृत्‍यु

हल्द्वानी: राज्य सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की बात करती है। उनकी कामयाबी को अपनी राज्य के साथ भी जोड़ा जाता है, जैसे की सरकार की छवि अच्छी हो, फिर उन्हें आशीर्वाद देने का सिलसिला भी शुरू होता है। यह बस अच्छे वक्त के लिए होता है,बुरे वक्त में यही सरकार मुंह मोड लेती है। मूल रूप से द्वाराहाट के ग्राम छतगुल्ला निवासी धाविका गरिमा जोशी पिछले साल बेंगलुरू में अभ्यास से वापस आते वक्त सड़क हादसे का शिकार हो गई थी। हादसे में रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण गरिमा व्हीलचियर पर आ गईं। स्पाइनल इंजरी सेंटर दिल्ली में के बाद वर्तमान में उसका उपचार बेंगलुरू में चल रहा है। हादसे के बाद सरकार ने गरिमा के पूर्ण इलाज का जिम्मा उठाया था लेकिन वह पूरा नहीं हुआ।

गरिमा के पिता पूरन चंद्र जोशी ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा है कि घायल बेटी और पत्नी का उपचार कराते वह कर्ज में डूब चुके हैं। उनकी पत्नी कैंसर से पीडित थी, जिनका निधन मार्च 2019 में हो गया। राज्य सरकार ने गरिमा के इलाज का पूरा खर्च उठाने का वादा किया था। मगर, 13.10 लाख रुपये की आर्थिक मदद के बाद सरकार ने भी उपचार के बिलों का भुगतान करने से मना कर दिया। गरिमा के पिता पूरन चंद्र जोशी ने बताया कि बेटी के इलाज के लिए उन्होंने बैंक से ऋण भी लिया। उसे न चुका पाने के कारण अब उनका पैतृक मकान नीलाम होने की स्थिति में है।

बता दें कि धाविका गरिमा जोशी 31 मई 2018 में बेंगलुरू में 10 किमी दौड़ पतियोगिता में भाग लेने के लिए गईं थी। जहां अभ्यास के बाद स्टेडियम से निकलने के दौरान अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी थी। हादसे में रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण गरिमा व्हीलचियर पर आ गईं। स्पाइनल इंजरी सेंटर दिल्ली में के बाद वर्तमान में उसका उपचार बेंगलुरू में चल रहा है। गरिमा का परिवार परेशान है और पिता ने आठ नवंबर को अपनी इच्छा मृत्यु की गुहार राष्ट्रपति से लगाई थी। एक माह बाद भी उनके प्रार्थना पत्र पर की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें नहीं दी गई है। अब दोबारा इच्छा मृत्यु की मांग वाला प्रार्थनापत्र भेजा है।

गरिमा ने 2014 में केंद्रीय विद्यालय संगठन दून की राज्य मैराथन प्रतियोगिता में स्वर्ण व अहमदाबाद में राष्ट्रीय मैराथन में स्वर्ण पदक जीता। 2016 में दून हाफ मैराथन में उन्हे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। कामयाबी यही नहीं रुकि और फिर गरिमा 2017 में पंजाब मैराथन में प्रथम स्थान पर रही। 2018 में गरिमा अंतरराष्ट्रीय मैराथन में टॉप छह खिलाडिय़ों की लिस्ट में भी शामिल रही। इसी साल व्हीलचेयर दौड़ में दूसरा स्थान पाया। 2019 में दिल्ली सफदरजंग अस्पताल की व्हीलचेयर मैराथन में द्वितीय तथा 500 मीटर वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया।

गरिमा ने घायल होने के बाद भी मैदान नहीं छोड़ा। उसने व्हील चेयर पर ही खेलों का अभ्यास जारी रखा। गरिमा के जज्बे व उत्कृष्ट खेल को देखते हुए हरियाणा सरकार ने उसे व्हील चेयर बास्केटबाल टीम का कैप्टन नियुक्त किया। मोहाली में हुई छठीं राष्ट्रीय व्हीलचेयर बास्केटबाल प्रतियोगिता में टीम कैप्टन गरिमा को बेस्ट न्यूकमर फीमेल प्लेयर के सम्मान से नवाजा गया। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया। हालांकि इस प्रतियोगिता में हरियाणा की टीम चैंपियन नहीं बनी।