उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों को किया जाएगा होम आइसोलेट , 17 दिन होगी अवधि

उत्तराखंड में अन्य राज्यों की तरह अब कोरोना पॉजिटिव मरीजों को होम आइसोलेशन किया जाएगा

देहरादून: राज्य में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार की कोशिश हैं कि रिकवरी रेट को बढ़ाया जाए और सुरक्षा हेतु सभी प्रकार के फैसले लिए जाए। अब राज्य में एक नई व्यवस्था को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। कोरोना वायरस से ग्रस्त मरीज को अब होम आइसोलेट करने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो होम आइसोलेट उन मरीजों को किा जाएगा जिन पर कोरोना वायरस के लक्ष्यण नहीं होंगे। होम आइसोलेशन की अवधि 17 दिन की होगी। इस संबंध में जल्द गाइडलाइन जारी की जाएगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार उत्तराखंड में भी अन्य राज्यों की भांति होम आइसोलेशन की व्यवस्था शुरू करने जा रही है। इसका निर्णय ले लिया गया है। यह व्यवस्था केवल बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों के लिए ही होगी। होम आइसोलेशन की गाइडलाइन जल्द जारी कर दी जाएगी। सचिवालय में शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आमजन को होम आइसोलेशन के संबंध में जानकारी देने के लिए दिशा-निर्देश पुस्तिका का विमोचन किया।

इस नियम के लागू होने के बाद कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीज का परीक्षण करेगी। रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाएगा कि मरीज को होम आइसोलेशन में रखा जा सकता है या नहीं। होम आइसोलेशन में रखे जाने से पहले मरीज को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग हर दिन फोन कर मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी लेगी।

7 दिनों की अवधि के अंतिम दस दिनों में बुखार या अन्य कोई लक्षण न आने पर होम आइसोलेशन समाप्त करने का फैसला लिया जाएगा। इसके बाद मरीज को टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं होगी। होम आइसोलेशन के लिए वातावरण का भी ध्यान रखा जाएगा। मरीज के घर में हवादार कमरा और अलग शौचालय होना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग इसे चैक करेगा। घअगर मरीज के घर में ऐसी व्यवस्था नहीं होगी तो उसे कोविड केयर सेंटर में रखा जाएगा। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज की देखभाल के लिए घर में तीमारदार का होना भी जरूरी है। मरीज के घर में अगर 65 वर्ष से अधिक आयु, गंभीर बीमारी से पीड़ित या गर्भवती महिला सदस्य हैं या फिर उन्हें किसी जानकार के घर में ठहराने की व्यवस्था करनी होगी।

बता दें कि सोशल मीडिया पर सरकारी हॉस्पिटलों के वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिसमें मरीजों ने कहा कि वह भले ही कोरोना वायरस से संक्रमित हो लेकिन उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। वह हॉस्पिटल की बजाए घर या फिर होटल पर आइसोलेट होने की वकालत कर रहे थे।

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