आज 9 नवंबर को केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो गए, अब अगले छह महीने तक ओम्कारेश्वर मंदिर, उखीमठ में बाबा केदारनाथ की पूजा होती ह। वीडियो में आप मंदिर को देखने के साथ ज्यादा जानकारी ले सकते हैं।

उखीमठ उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग ज़िले में स्थित एक प्रसिद्द तीर्थ स्थल है है। उखीमठ समुद्रतल से लगभग 1311 मीटर (4300 फ़ुट) की उचाई पर स्थित है।
यह ओमकेरेश्वर मंदिर, देश के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है. दीवाली के बाद जब केदारधाम के कपाट बंद हो जातें हैं तब सर्दियों के दौरान (नवंबर से अप्रैल) के बीच केदारनाथ और मद्महेश्वर से भगवान शिव को डोली द्वारा एवं छत्र, त्रिशूल आदि प्रतीकात्मक निशानों के साथ इस मंदिर में लाया जाता है और यहां छह महीने तक पूजा की जाती है। ये मंदिर का सामने का भाग, इसकी बनावट देख के आपको बदरीधाम धाम से मिलती जुलती है।

ऐसी मान्यता है की ये मंदिर काफी प्राचीन १२ वी शताब्दी का है, कहा जाता है कि केशव मंदिर में जो समुख शिवलिंग है, वह कत्यूरी शासन के समय का है। मंदिर का वर्तमान भवन अधिक प्राचीन नहीं है। कहा जाता है कि उखीमठ स्थान का मूल नाम ‘उषा’ या ‘उषा मठ’ था, जो अपभ्रंश होकर उखीमठ हो गया।

यह स्थान पंच केदार काभी मुख्य पड़ाव है यहाँ पर भगवान शंकर ने राजा मान्धाता की तपस्या से प्रसन्न होकर ओंकार रूप में दर्शन दिये थे तब से ये मंदिर ओंकारेश्वर मंदिर कहलाता है
यहाँ से जुडी एक पौराणिक कथा के अनुसार बाणासुर की बेटी – उषा और भगवान कृष्ण के पौत्र – अनिरुद्ध की शादी यहीं हुई थी। उषा के नाम से इस जगह का नाम उखीमठ पड़ा।

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